विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में भगवान विष्णु नरक से लौटने के बाद पापियों को मिलने वाली योनियों का विस्तृत वर्णन करते हैं। इस संदर्भ में स्पष्ट रूप से कहा गया है — 'स्त्री की हत्या करने वाला तथा गर्भपात कराने वाला पुलिन्द (भिल्ल/भील) होकर रोगी होता है।'
पुलिन्द उन आदिवासी जनजातियों को कहा जाता था जो उस काल में समाज के बाहरी क्षेत्रों में, वनों में रहती थीं और जिनके जीवन में धर्म-कर्म की सुविधाएँ अत्यंत सीमित थीं। शास्त्रीय दृष्टि से यह योनि दंड-स्वरूप है — जिसने सबसे निर्बल प्राणियों (स्त्री और गर्भस्थ शिशु) की हत्या की, वह स्वयं ऐसी योनि में जन्म लेता है जहाँ उसे कठिन परिस्थितियों में जीना पड़ता है और साथ में रोग भी भोगना पड़ता है।
गर्भपात को गरुड़ पुराण में महापाप माना गया है क्योंकि यह एक ऐसी आत्मा की हत्या है जो अभी तक निर्दोष और असहाय अवस्था में है। इसीलिए इसका दंड अत्यंत कठोर है।
चतुर्थ अध्याय में यह भी बताया गया है कि ये पापी विशेष रूप से वैतरणी नदी में गिराए जाते हैं — 'स्त्री की हत्या करने वाले, गर्भपात करने वाले' इस सूची में स्पष्ट रूप से हैं।
गरुड़ पुराण के 36 नरकों में 'तप्तसूर्मि' नामक नरक में भ्रूण हत्या करने वालों को गर्म सुइयों से चुभोने का दंड बताया गया है। इस प्रकार पहले नरक-यातना, फिर पुलिन्द योनि में जन्म — यह दोहरा दंड स्त्री-हत्या और गर्भपात के पाप की गंभीरता को दर्शाता है।





