विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में भगवान विष्णु स्पष्ट रूप से कहते हैं — 'ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी होता है, गाय की हत्या करने वाला मूर्ख और कुबड़ा होता है, कन्या की हत्या करने वाला कोढ़ी होता है और ये तीनों पापी चाण्डाल योनि प्राप्त करते हैं।'
तीनों को एक ही योनि क्यों — इसका कारण यह है कि ये तीनों पाप एक ही श्रेणी के हैं। ब्राह्मण ज्ञान का प्रतीक है, गाय पोषण और धर्म का प्रतीक है और कन्या भविष्य और वंश का प्रतीक है। इन तीनों की रक्षा करना धर्म का मूल है और इनकी हत्या तीनों ही स्तंभों को नष्ट करती है। इसीलिए इन तीनों पापियों को समान रूप से चांडाल योनि का दंड मिलता है।
चांडाल योनि में जन्म को शास्त्र में अत्यंत कठोर दंड माना गया है — यह न तो पशु योनि है और न मनुष्य योनि की उच्च स्थिति। यहाँ व्यक्ति मनुष्य-शरीर में है लेकिन समाज की सभी धार्मिक सुविधाओं से वंचित, संस्कारों से दूर और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करता है।
गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि इन तीन महापातकों से प्राप्त नरकों का भोग करने के बाद भी जब जीव मर्त्यलोक में आते हैं तो 'ब्रह्महत्यारा गधा, ऊँट और महिषी की योनि प्राप्त करता है।' अर्थात नरक + चांडाल + पशु योनि — यह त्रिस्तरीय दंड इन महापापों के लिए निर्धारित है।



