विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और गरुड़ पुराण दोनों इस बात को अत्यंत स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं कि भारतवर्ष में जन्म लेना हज़ारों जन्मों के पुण्यों का एकत्रीकरण है। गरुड़ पुराण के अनुसार जीव चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् जब उसके पाप और पुण्य का संतुलन होता है तब उसे यह दुर्लभ मनुष्य शरीर भारत भूमि पर प्राप्त होता है। इस भूमि पर जन्म लेना इसलिए दुर्लभ है क्योंकि केवल यहीं मोक्ष की प्राप्ति संभव है। देवता भी स्वर्ग में बैठकर इस भारत भूमि पर जन्म लेने की लालसा करते हैं। विष्णु पुराण में कहा गया है कि इस भूमि पर जन्म लेना एक ऐसा सुअवसर है जिसे सांसारिक विषय-भोगों में व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। भारतवर्ष एकमात्र ऐसी भूमि है जहाँ नए कर्म करने की स्वतंत्रता है, जहाँ चारों युग होते हैं, जहाँ धर्म और अधर्म का संघर्ष होता है और इसी संघर्ष में जीव वैराग्य प्राप्त करके मोक्ष का मार्ग खोजता है।
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