विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद गो-दान (गाय दान) हिंदू अंतिम संस्कार का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।
कारण (गरुड़ पुराण)
- 1वैतरणी नदी: मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक जाते समय वैतरणी नदी (रक्त-पूय से भरी भयानक नदी) पार करनी होती है। गो-दान करने वाले की गाय आत्मा को पूँछ पकड़ाकर इस नदी को पार कराती है।
- 2गाय = देवमाता: गाय में 33 कोटि (प्रकार) देवता। गो-दान = सबसे बड़ा दान।
- 3पाप क्षय: गो-दान से मृतक के पापों का क्षय।
- 4पितृ तृप्ति: गाय = पितरों तक भोजन पहुँचाने का माध्यम।
विधि
- ▸मृत्यु के बाद (दाह संस्कार से पहले या बाद) ब्राह्मण/पात्र व्यक्ति को गाय दान करें।
- ▸गाय न संभव हो तो गो-दान का धन (गाय की कीमत) दान करें।
- ▸गौशाला में दान भी स्वीकार्य।
आधुनिक संदर्भ: गाय दान संभव न हो तो गौशाला में धन/चारा/सेवा दान करें — भाव महत्वपूर्ण।





