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अंतिम संस्कार📜 गरुड़ पुराण1 मिनट पठन

मृत्यु के बाद गाय दान क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण: वैतरणी नदी पार कराने गाय पूँछ पकड़ाती है। गाय = देवमाता (33 कोटि देव)। गो-दान = सबसे बड़ा दान, पाप क्षय। गाय न हो = गौशाला दान/धन दान। भाव प्रधान।

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विस्तृत उत्तर

मृत्यु के बाद गो-दान (गाय दान) हिंदू अंतिम संस्कार का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।

कारण (गरुड़ पुराण)

  1. 1वैतरणी नदी: मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक जाते समय वैतरणी नदी (रक्त-पूय से भरी भयानक नदी) पार करनी होती है। गो-दान करने वाले की गाय आत्मा को पूँछ पकड़ाकर इस नदी को पार कराती है।
  2. 2गाय = देवमाता: गाय में 33 कोटि (प्रकार) देवता। गो-दान = सबसे बड़ा दान।
  3. 3पाप क्षय: गो-दान से मृतक के पापों का क्षय।
  4. 4पितृ तृप्ति: गाय = पितरों तक भोजन पहुँचाने का माध्यम।

विधि

  • मृत्यु के बाद (दाह संस्कार से पहले या बाद) ब्राह्मण/पात्र व्यक्ति को गाय दान करें।
  • गाय न संभव हो तो गो-दान का धन (गाय की कीमत) दान करें।
  • गौशाला में दान भी स्वीकार्य।

आधुनिक संदर्भ: गाय दान संभव न हो तो गौशाला में धन/चारा/सेवा दान करें — भाव महत्वपूर्ण।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण
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