विस्तृत उत्तर
मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ हिंदू अंतिम संस्कार का महत्वपूर्ण अंग है।
क्यों करते हैं
- 1आत्मा का मार्गदर्शन: गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा (यमलोक तक) का विस्तृत वर्णन है। पाठ सुनने से आत्मा को मार्ग मिलता है।
- 2कर्मफल ज्ञान: पाप-पुण्य के फल, नर्क-स्वर्ग, पुनर्जन्म — यह ज्ञान आत्मा और परिजनों दोनों के लिए।
- 3प्रेत योनि से मुक्ति: सही संस्कार न हो तो आत्मा प्रेत बनती है (गरुड़ पुराण)। पाठ से प्रेत योनि से रक्षा।
- 4परिजनों को ज्ञान: मृत्यु का दुख सहन करने और धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा।
- 5तर्पण की शक्ति: गरुड़ पुराण (Webdunia verified): *'व्यक्ति मरने के बाद ऊपर के लोक में सफर करता है — तर्पण से ही उसे आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।'*
कब: मृत्यु के बाद 13 दिनों तक (दशगात्र/तेरहवीं तक) प्रतिदिन पाठ।
कौन करे: विद्वान ब्राह्मण/पंडित। परिवार के सदस्य सुनें।
ध्यान दें: कुछ विद्वानों का मत है कि गरुड़ पुराण केवल मृत्यु पर ही नहीं, सामान्य समय में भी पढ़ा जा सकता है — यह ज्ञान ग्रंथ है, भय का नहीं।





