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अंतिम संस्कार📜 गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र2 मिनट पठन

मृत व्यक्ति के मुख में सोना क्यों रखते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

सोना = शुद्धतम धातु (अग्नि तत्व)। पंचतत्व शुद्धि, यमलोक यात्रा सहायता, अंतिम दान/पुण्य। मुख में स्वर्ण + गंगाजल + तुलसी। सोना न हो = चांदी/तांबा। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।

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विस्तृत उत्तर

मृत व्यक्ति के मुख में सोना (स्वर्ण) रखना एक प्राचीन हिंदू परंपरा है।

कारण

  1. 1सोना = अमृत/अग्नि तत्व: सोना सबसे शुद्ध और पवित्र धातु — यह अग्नि तत्व का प्रतीक है। मुख में रखने से शरीर शुद्ध होता है।
  2. 2पंचतत्व शुद्धि: सोना = अग्नि, गंगाजल = जल, तुलसी = पृथ्वी — सभी तत्वों से शुद्धि।
  3. 3यमलोक यात्रा: मान्यता है कि सोना मृतक को यमलोक यात्रा में सहायता करता है — यमदूतों से रक्षा।
  4. 4दान स्वरूप: अंतिम समय में सोना = अंतिम दान — मृतक के खाते में पुण्य।
  5. 5आत्मा शुद्धि: सोने के स्पर्श से आत्मा शुद्ध होकर शरीर त्यागती है।

विधि: मृत व्यक्ति के मुख में छोटा सा स्वर्ण टुकड़ा/दाना + गंगाजल + तुलसी दल + पंचगव्य (गाय दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर)।

सोना न हो: चांदी या तांबे का सिक्का भी रखा जा सकता है — आर्थिक स्थिति अनुसार।

ध्यान दें: यह पारंपरिक संस्कार है। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र
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