विस्तृत उत्तर
मृत व्यक्ति के मुख में सोना (स्वर्ण) रखना एक प्राचीन हिंदू परंपरा है।
कारण
- 1सोना = अमृत/अग्नि तत्व: सोना सबसे शुद्ध और पवित्र धातु — यह अग्नि तत्व का प्रतीक है। मुख में रखने से शरीर शुद्ध होता है।
- 2पंचतत्व शुद्धि: सोना = अग्नि, गंगाजल = जल, तुलसी = पृथ्वी — सभी तत्वों से शुद्धि।
- 3यमलोक यात्रा: मान्यता है कि सोना मृतक को यमलोक यात्रा में सहायता करता है — यमदूतों से रक्षा।
- 4दान स्वरूप: अंतिम समय में सोना = अंतिम दान — मृतक के खाते में पुण्य।
- 5आत्मा शुद्धि: सोने के स्पर्श से आत्मा शुद्ध होकर शरीर त्यागती है।
विधि: मृत व्यक्ति के मुख में छोटा सा स्वर्ण टुकड़ा/दाना + गंगाजल + तुलसी दल + पंचगव्य (गाय दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर)।
सोना न हो: चांदी या तांबे का सिक्का भी रखा जा सकता है — आर्थिक स्थिति अनुसार।
ध्यान दें: यह पारंपरिक संस्कार है। सबसे महत्वपूर्ण = ईश्वर स्मरण।





