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शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म प्रश्नोत्तर — 3 प्रश्न

शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म से जुड़े 3 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 3 प्रश्न

'एको हं बहुस्याम्' का क्या अर्थ है?

'एको हं बहुस्याम्' का अर्थ है 'मैं एक हूँ, अनेक हो जाऊँ' — यह परब्रह्म का वह संकल्प है जिससे निर्गुण में स्पंदन उत्पन्न हुआ और नाद-ब्रह्म (शब्द-ब्रह्म) प्रकट हुआ।

एको हं बहुस्याम्परब्रह्म संकल्पसृष्टि उत्पत्ति
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प्रणव 'ॐ' क्या है?

प्रणव 'ॐ' नाद-ब्रह्म की सबसे पहली और स्थूल अभिव्यक्ति है — ॐ ही वह मूल ध्वनि है जिससे सम्पूर्ण वेद, समस्त मंत्र और यह चराचर जगत उत्पन्न हुआ है।

प्रणव ॐआदि बीजमूल ध्वनि
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नाद ब्रह्म क्या है?

परब्रह्म में 'एको हं बहुस्याम्' के संकल्प से जो आदिम स्पंदन उत्पन्न हुआ वही 'नाद-ब्रह्म' या 'शब्द-ब्रह्म' कहलाया — यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त अनाहत ध्वनि है जिसे योगीजन गहन समाधि में सुनते हैं।

नाद ब्रह्मआदिम स्पंदनअनाहत ध्वनि
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शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म को गहराई से समझने का तरीका

शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

3 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।