ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

देव ज्ञान प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

देव ज्ञान से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

विष्णु शेषनाग पर क्यों सोते?

शेष=अनंत, ब्रह्मांड आधार। क्षीरसागर=शुद्ध चेतना। योगनिद्रा=सचेत(OS background)। लक्ष्मी चरण=शक्ति सेवा। नाभि कमल→ब्रह्मा=सृष्टि विष्णु से।

विष्णुशेषनागक्षीरसागर
पूरा उत्तर पढ़ें →

हनुमान जी की दक्षिणमुखी मूर्ति का विशेष महत्व?

दक्षिण=यम दिशा। दक्षिणमुखी=यम विजय, मृत्यु भय/तंत्र/प्रेत नाश। दुर्लभ+शक्तिशाली। मंगल/शनि, बजरंग बाण। शत्रु/तांत्रिक विशेष। घर=दक्षिण दीवार।

हनुमानदक्षिणमुखीतंत्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

हनुमान जी के 12 नाम क्या हैं?

हनुमान जी के 12 नाम हैं — 1.हनुमान, 2.अंजनीसुत, 3.वायुपुत्र, 4.महाबल, 5.रामेष्ट, 6.फाल्गुनसखा, 7.पिंगाक्ष, 8.अमितविक्रम, 9.उदधिक्रमण, 10.सीताशोकविनाशन, 11.लक्ष्मणप्राणदाता, 12.दशग्रीवदर्पहा। रात को सोने से पहले इनका पाठ सभी शत्रुओं का नाश करता है।

हनुमान 12 नामद्वादश नामस्तुति
पूरा उत्तर पढ़ें →

हनुमान जी आज भी जीवित — शास्त्रीय प्रमाण?

8 चिरंजीवी श्लोक: हनुमान=कल्प अंत तक। राम वरदान: 'राम कथा तक जीवित।' रामचरितमानस: 'जहाँ कथा=वहाँ हनुमान।' तुलसीदास/रामदास=दर्शन। शास्त्रीय=स्पष्ट, भौतिक=श्रद्धा।

हनुमानचिरंजीवीजीवित
पूरा उत्तर पढ़ें →

विष्णु के चार हाथ — शंख चक्र गदा पद्म अर्थ?

शंख=ॐ/धर्म आह्वान। चक्र=काल/अधर्म नाश। गदा=बल/दंड। पद्म=सृष्टि/शुद्धता(कीचड़ में कमल)। 4 हाथ=4 पुरुषार्थ: धर्म/अर्थ/काम/मोक्ष। विष्णु=सम्पूर्ण पालक।

विष्णुचार हाथशंख
पूरा उत्तर पढ़ें →

देव ज्ञान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर देव ज्ञान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

देव ज्ञान को गहराई से समझने का तरीका

देव ज्ञान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।