विस्तृत उत्तर
विष्णु = क्षीरसागर (दूध सागर) में शेषनाग (अनंत) पर शयन = योगनिद्रा।
अर्थ
- 1शेष = अनंत = शेष (बचा हुआ)। सृष्टि समाप्त → जो शेष रहे = अनंत = विष्णु आधार। ब्रह्मांड = शेषनाग फण पर।
- 2क्षीरसागर = शुद्ध चेतना। दूध = शुद्ध। विष्णु = शुद्ध चेतना में विश्राम।
- 3योगनिद्रा ≠ सोना। विष्णु = सचेत निद्रा = सृष्टि पालन करते हुए विश्राम — जैसे Operating System background में चलता।
- 4लक्ष्मी चरण दबातीं: = शक्ति (लक्ष्मी) सदैव सेवा में = शक्ति बिना पालन असंभव।





