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विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु महाप्रलय के बाद योगनिद्रा में थे क्योंकि उस समय पुरानी सृष्टि जल में लीन हो चुकी थी और नई सृष्टि अभी प्रारंभ नहीं हुई थी। यह योगनिद्रा विश्राम मात्र नहीं, बल्कि सृष्टि के बीजों को धारण करने की दिव्य अवस्था है। इसी अवस्था में विष्णु अनंत शेष पर शयन करते हैं और उनके भीतर समस्त जीवों के कर्म-संस्कार सूक्ष्म रूप में सुरक्षित रहते हैं। जब नई सृष्टि का समय आता है, तब उनकी नाभि से कमल प्रकट होता है और ब्रह्मा जी जन्म लेते हैं। मधु कैटभ कथा इसी संक्रमण काल में घटती है।
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