विस्तृत उत्तर
जब ब्रह्मा जी की पूरी आयु के 100 दिव्य वर्ष (दो परार्ध या महाकल्प) पूर्ण हो जाते हैं तब प्राकृतिक प्रलय या महाप्रलय होता है। इस महाप्रलय में महत्-तत्त्व, अहङ्कार और पञ्चमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) सहित सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड (सत्यलोक और महर्लोक सहित सभी 14 लोक) भगवान नारायण की प्रकृति में विलीन हो जाते हैं। इस प्राकृतिक प्रलय के समय महर्लोक भी अन्य लोकों की भाँति पूर्ण रूप से भस्म और नष्ट हो जाता है। उस समय महर्लोक के निवासी जो सत्यलोक पहुँच चुके होते हैं वे ब्रह्मा जी के साथ ही आत्यन्तिक प्रलय (मोक्ष) को प्राप्त होकर साक्षात् भगवान के परम धाम (वैकुण्ठ) में प्रवेश कर जाते हैं।
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