विस्तृत उत्तर
लक्ष्मी जी समुद्र में इसलिए चली गईं क्योंकि दुर्वासा ऋषि के श्राप से इंद्र और देवता श्रीहीन हो गए थे। इंद्र ने दिव्य माला का अपमान किया था, जिसमें श्री और सौभाग्य का निवास माना गया था। श्राप के प्रभाव से देवताओं के पास से ऐश्वर्य, तेज और समृद्धि हट गई। देवी लक्ष्मी का स्वभाव है कि वे सम्मान, मर्यादा, धर्म और विनम्रता वाले स्थान पर ही टिकती हैं। जब स्वर्ग अहंकार और अपमान से दूषित हुआ, तब लक्ष्मी जी क्षीरसागर में चली गईं। बाद में समुद्र मंथन से वे पुनः प्रकट हुईं और भगवान विष्णु को वरण किया।
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