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विस्तृत उत्तर
महाप्रलय के बाद स्थूल रूप में कुछ भी शेष नहीं रहता। पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, तारे, दिशाएँ, देवता और लोक सब अपने दृश्य रूप को खोकर अव्यक्त अवस्था में चले जाते हैं। इस कथा के अनुसार उस समय केवल कारण-जल, अनंत शेष और योगनिद्रा में स्थित भगवान विष्णु का दिव्य आधार शेष रहता है। इसका अर्थ है कि प्रलय पूर्ण विनाश नहीं, बल्कि सृष्टि का अपने मूल कारण में लौट जाना है।
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