ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
लोक⏱ 1 मिनट पठन

सृष्टि शुरू होने से पहले क्या था?

संक्षिप्त उत्तर

सृष्टि से पहले अव्यक्त शून्य, कारण-जल और विष्णु की योगनिद्रा अवस्था थी।

📖

विस्तृत उत्तर

सृष्टि शुरू होने से पहले न पृथ्वी थी, न सूर्य, न चंद्रमा, न तारे और न दिशाओं का कोई अर्थ था। कथा में इस अवस्था को पूर्ण शून्य और प्रकृति की साम्यावस्था कहा गया है, जहाँ सत्त्व, रजस और तमस तीनों गुण शांत संतुलन में थे। सब जीव और लोक अपने सूक्ष्म कारण रूप में परम चेतना में लीन थे। उसी शांति में भगवान विष्णु योगनिद्रा में स्थित थे और सृष्टि का बीज उनके संकल्प में सुरक्षित था।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

सृष्टि शुरू होने से पहले क्या था को संदर्भ सहित समझें

सृष्टि शुरू होने से पहले क्या था का सबसे सीधा सार यह है: सृष्टि से पहले अव्यक्त शून्य, कारण-जल और विष्णु की योगनिद्रा अवस्था थी।

लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

•

उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

•

लोक श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

•

यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

लोक प्रश्नोत्तर
🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

सृष्टिमहाप्रलयअव्यक्त
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

सृष्टि शुरू होने से पहले क्या था — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको लोक से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#सृष्टि#महाप्रलय#अव्यक्त