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विस्तृत उत्तर
इस कथा में क्षीरसागर कोई साधारण समुद्र नहीं है, बल्कि सृष्टि से पहले और महाप्रलय के बाद की वह दिव्य अवस्था है जहाँ सब कुछ कारण रूप में शांत पड़ा रहता है। जब पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, तारे, दिशाएँ और लोक सब लीन हो जाते हैं, तब क्षीरसागर का कारण-जल शेष रहता है। इसी जल पर अनंत शेषनाग की शय्या पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में स्थित रहते हैं। यह रहस्य बताता है कि सृष्टि अचानक शून्य से नहीं आती, बल्कि अव्यक्त चेतना और परम संकल्प से फिर जागती है।
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