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विस्तृत उत्तर
क्षीरसागर को कारण जल इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें सृष्टि अपने कारण रूप में सुरक्षित रहती है। महाप्रलय के बाद स्थूल जगत दिखाई नहीं देता, लेकिन जीवों के कर्म, तत्वों की संभावना और प्रकृति की शक्ति नष्ट नहीं होती। वे सब इसी कारण-जल में अव्यक्त रूप से स्थित रहते हैं। जब भगवान विष्णु का सृजन-संकल्प जागता है, तो यही कारण जल आदिनाद और प्रथम श्वास से फिर सृष्टि में बदलने लगता है।
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