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विस्तृत उत्तर
एकसूत्रीय जल वह दिव्य अवस्था है जिसमें सृष्टि के सभी भेद मिटकर एक आधार में लीन हो जाते हैं। इसमें सुख-दुख, प्रकाश-अंधकार, जन्म-मृत्यु और जीवों के कर्म अलग-अलग दिखाई नहीं देते। यह पृथ्वी के जल जैसा पदार्थ नहीं, बल्कि चेतना और संभावना का एकीकृत कारण रूप है। महाप्रलय के बाद यही अवस्था रहती है और नई सृष्टि इसी से प्रकट होती है।
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