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विस्तृत उत्तर
समुद्र मंथन क्षीरसागर में हुआ था, जिसे दूध का दिव्य महासागर भी कहा जाता है। पुराणों में क्षीरसागर को भगवान विष्णु का दिव्य निवास-क्षेत्र माना गया है, जहाँ वे शेषनाग पर योगनिद्रा में शयन करते हैं। इसी महासागर के गर्भ में अमृत और अनेक दिव्य रत्न छिपे हुए थे। देवताओं और असुरों ने मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग की सहायता से इसी क्षीरसागर का मंथन किया। यह साधारण भौतिक समुद्र नहीं, बल्कि पौराणिक और ब्रह्मांडीय स्तर का दिव्य समुद्र माना जाता है।
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