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देव ज्ञान📜 हनुमान पुराण, वाल्मीकि रामायण, हनुमन्नाम स्तोत्र, स्कंद पुराण3 मिनट पठन

हनुमान जी के 12 नाम क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

हनुमान जी के 12 नाम हैं — 1.हनुमान, 2.अंजनीसुत, 3.वायुपुत्र, 4.महाबल, 5.रामेष्ट, 6.फाल्गुनसखा, 7.पिंगाक्ष, 8.अमितविक्रम, 9.उदधिक्रमण, 10.सीताशोकविनाशन, 11.लक्ष्मणप्राणदाता, 12.दशग्रीवदर्पहा। रात को सोने से पहले इनका पाठ सभी शत्रुओं का नाश करता है।

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विस्तृत उत्तर

हनुमान जी के 12 नामों का स्तोत्र 'हनुमद्द्वादशनाम स्तोत्र' के नाम से प्रसिद्ध है। प्रत्येक नाम का अपना विशेष अर्थ और महत्व है:

हनुमान जी के 12 नाम (द्वादश नाम)

1हनुमान (हनुमान्)

अर्थ: जिनकी हनु (ठुड्डी) विशेष है — बचपन में इंद्र के वज्र से हनु आहत हुई थी।

विशेषता: सर्वनाम, सर्वसंकट हर्ता।

2अंजनीसुत

अर्थ: माता अंजना के पुत्र।

विशेषता: माता अंजना की भक्ति और सेवा का प्रतीक।

3वायुपुत्र

अर्थ: वायुदेव के पुत्र।

विशेषता: वायु तत्व के अधिपति — गति, बल और प्राण शक्ति के स्वामी।

4महाबल

अर्थ: अतुलनीय बल वाले।

विशेषता: समस्त देवताओं में सर्वाधिक बली — 'अतुलितबलधामम्'।

5रामेष्ट

अर्थ: श्री राम के प्रिय।

विशेषता: राम और हनुमान का अटूट भक्त-भगवान संबंध।

6फाल्गुनसखा

अर्थ: अर्जुन (फाल्गुन) के मित्र।

विशेषता: महाभारत में हनुमान जी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजमान थे।

7पिंगाक्ष

अर्थ: पिंगल (भूरी-लाल) आँखों वाले।

विशेषता: हनुमान जी के नेत्रों का तेज सूर्य के समान है।

8अमितविक्रम

अर्थ: असीमित पराक्रम वाले।

विशेषता: लंका दहन और सागर लांघने का अद्भुत पराक्रम।

9उदधिक्रमण

अर्थ: समुद्र को लांघने वाले।

विशेषता: एक ही छलांग में 100 योजन का समुद्र पार किया।

10सीताशोकविनाशन

अर्थ: सीता माँ के शोक का नाश करने वाले।

विशेषता: लंका में सीता जी को राम का संदेश देकर उनका दुख दूर किया।

11लक्ष्मणप्राणदाता

अर्थ: लक्ष्मण के प्राण देने वाले।

विशेषता: संजीवनी बूटी लाकर मूर्छित लक्ष्मण जी के प्राण बचाए।

12दशग्रीवदर्पहा

अर्थ: दस सिरों वाले रावण का अहंकार चूर करने वाले।

विशेषता: लंका में रावण की सभा में दूत रूप में गए और उसका दर्प तोड़ा।

द्वादश नाम स्तोत्र

> हनुमानंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबलः।

> रामेष्टः फाल्गुनसखः पिंगाक्षोऽमितविक्रमः॥

> उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः।

> लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥

> द्वादशैतानि नामानि कपींद्रस्य महात्मनः।

> स्वापकाले पठेन्नित्यं सर्वशत्रुविनाशनम्॥

पाठ का फल

हनुमान पुराण के अनुसार — जो प्रतिदिन सोने से पहले इन 12 नामों का पाठ करता है, उसके सभी शत्रु नष्ट होते हैं, रात्रि में भय नहीं आता और हनुमान जी उसकी रक्षा करते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
हनुमान पुराण, वाल्मीकि रामायण, हनुमन्नाम स्तोत्र, स्कंद पुराण
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