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शिव पार्वती विवाह प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

शिव पार्वती विवाह से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

शिव और पार्वती के विवाह में सप्तपदी का क्या विधान था?

शिव-पार्वती विवाह में ब्रह्मा पुरोहित बने। अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए गए जिसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रतिज्ञाएं शामिल थीं। शिव ने वैदिक मंत्रों के साथ विवाह के सभी लोकाचार पूरे किए।

सप्तपदीशिव पार्वती विवाहविवाह विधि
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शिव की बारात में कौन-कौन थे?

शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, सप्तर्षि, देवता, गंधर्व, यक्ष, नाग, किन्नर, गण, भूत-प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और समस्त जीव-जंतु शामिल थे। यह अब तक की सबसे विचित्र और अद्भुत बारात थी।

शिव बारातशिव पार्वती विवाहगण
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शिव की बारात को देखकर मेना ने क्या किया?

शिव की भयानक बारात देखकर माता मेना रो पड़ीं और विलाप करने लगीं। उन्होंने नारद को दोष दिया। पार्वती जी ने माँ को समझाया और नारद जी ने शिव की महिमा बताई, तब जाकर मेना विवाह के लिए मान गईं।

मेनाशिव बारातपार्वती माता
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शिव ने पार्वती से विवाह के लिए सुनटनर्तक रूप क्यों धारण किया?

शिव ने सुनटनर्तक (ब्राह्मण) रूप इसलिए धारण किया क्योंकि वे पार्वती के प्रेम और निश्चय की परीक्षा लेना चाहते थे। पार्वती ने शिव की निंदा सुनकर भी अपना निश्चय नहीं बदला, तब शिव प्रकट हुए और विवाह स्वीकार किया।

सुनटनर्तकशिव पार्वती परीक्षाशिव विवाह
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शिव पार्वती विवाह — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव पार्वती विवाह श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव पार्वती विवाह को गहराई से समझने का तरीका

शिव पार्वती विवाह प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।