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प्राणों का आवाहन प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

प्राणों का आवाहन से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

प्राण प्रतिष्ठा के बाद शिवलिंग क्या बन जाता है?

प्राण प्रतिष्ठा के बाद पाषाण-लिंग साधारण पत्थर नहीं रहता — वह साक्षात् शिव का जाग्रत और जीवंत विग्रह बनकर चेतना, ऊर्जा और कृपा का जीवंत केंद्र बन जाता है।

साक्षात् शिवजाग्रत विग्रहजीवंत
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'ॐ वाङ्मनस्त्वक्चक्षुः...' मंत्र का क्या अर्थ है?

'ॐ वाङ्मनस्त्वक्चक्षुः...' का अर्थ: हे प्रभु! आपकी वाणी, मन, त्वचा, नेत्र, कान, जिह्वा, घ्राण और समस्त कर्मेन्द्रियाँ यहाँ आकर सुखपूर्वक चिरकाल निवास करें।

मंत्र अर्थवाणी मन इंद्रियाँचिरकाल निवास
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प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य मंत्र क्या है?

प्राण प्रतिष्ठा मंत्र: 'ॐ वाङ्मनस्त्वक्चक्षुःश्रोत्रजिह्वाघ्राणपाणिपादपायूपस्थानि इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा।' — अर्थ: हे प्रभु! आपकी वाणी, मन, इंद्रियाँ यहाँ आकर चिरकाल निवास करें।

प्राण प्रतिष्ठा मंत्रवाङ्मनस्त्वक्चक्षुःइंद्रियाँ
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नेत्रोन्मीलन क्या होता है?

नेत्रोन्मीलन में मंत्रों के साथ शिवलिंग के नेत्र प्रतीकात्मक रूप से खोले जाते हैं — इसका भाव है कि अब देवता इस मूर्ति से देख सकते हैं और भक्तों पर कृपा-दृष्टि डाल रहे हैं।

नेत्रोन्मीलननेत्र खोलनाकृपा दृष्टि
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प्राणों का आवाहन — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर प्राणों का आवाहन श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

प्राणों का आवाहन को गहराई से समझने का तरीका

प्राणों का आवाहन प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।