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विस्तृत उत्तर
इस आवाहन के पूर्ण होते ही वह पाषाण-लिंग अब साधारण पाषाण नहीं रहता, अपितु साक्षात् शिव का जाग्रत और जीवंत विग्रह बन जाता है।
आगम-शास्त्रों में वर्णित प्राण-प्रतिष्ठा की प्रक्रिया द्वारा एक पाषाण-खंड चेतना, ऊर्जा और कृपा के एक जीवंत केंद्र में रूपांतरित हो जाता है।
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