विस्तृत उत्तर
प्राण-प्रतिष्ठा का एक प्रमुख मंत्र है:
ॐ वाङ्मनस्त्वक्चक्षुःश्रोत्रजिह्वाघ्राणपाणिपादपायूपस्थानि इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा।
इसका भाव है: 'हे प्रभु! आपकी वाणी, मन, त्वचा, चक्षु, श्रोत्र, जिह्वा, घ्राण एवं समस्त कर्मेन्द्रियाँ यहाँ आकर सुखपूर्वक चिरकाल तक निवास करें।'
इन मंत्रों के द्वारा भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है कि वे अपने प्राण, मन, बुद्धि, और समस्त इंद्रियों सहित इस लिंग-स्वरूप में प्रतिष्ठित होकर भक्तों की पूजा स्वीकार करें।




