विस्तृत उत्तर
तंत्र पूजा की विधि महानिर्वाण तंत्र और कुलार्णव तंत्र में विस्तार से वर्णित है:
तंत्र पूजा और सामान्य पूजा का अंतर
सामान्य पूजा में देव को बाहर देखते हैं — तंत्र पूजा में स्वयं को देव मानकर पूजा करते हैं। 'सोऽहम् भावना।'
तंत्र पूजा का क्रम
1शुद्धि
स्नान, आचमन, प्राणायाम।
2मंत्र न्यास
तंत्र विशेष — हाथ की उंगलियों पर और शरीर के अंगों पर मंत्र के अक्षर न्यास। शरीर को मंत्र-मय बनाना।
3भूत शुद्धि
ध्यान में — पुराने शरीर को पंचभूतों में विसर्जित करना और नया 'देव-शरीर' धारण।
4प्राण प्रतिष्ठा
मूर्ति में देवता का आवाहन।
5षोडशोपचार (16 उपचार)
आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, नमस्कार, विसर्जन।
6मंत्र जप
पूजा के बाद मंत्र जप — 108 या 1008 बार।
7समर्पण
यत्किंचित् जप-पूजा-फलं तत् सर्वं [देव] अर्पणमस्तु।





