विस्तृत उत्तर
ध्यान श्लोक (2.3) का पाठ करते हुए असितांग भैरव का यंत्र, विग्रह या स्थापित चित्र में आवाहन किया जाता है, उन्हें भक्त के समक्ष प्रकट होने के लिए प्रार्थना की जाती है।
असितांग भैरव का आवाहन कैसे करते हैं को संदर्भ सहित समझें
असितांग भैरव का आवाहन कैसे करते हैं का सबसे सीधा सार यह है: ध्यान श्लोक का पाठ करते हुए असितांग भैरव के यंत्र, विग्रह या चित्र में आवाहन करें और भक्त के समक्ष प्रकट होने की प्रार्थना करें।
साधना के चरण जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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कूर्म मुद्रा के साथ ध्यान क्यों करते हैं?
कूर्म मुद्रा के साथ ध्यान श्लोक पाठ से मन एकाग्र होता है और भैरव की सौम्यता मानसिक रूप से जागृत होती है — यह आवाहन का अनिवार्य अंग है।
द्वितीया श्राद्ध में किसका आवाहन होता है?
द्वितीया श्राद्ध में पार्वण विधि से तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन होता है। पितृ पक्ष से पिता, पितामह, प्रपितामह और मातृ पक्ष से मातामह, प्रमातामह, वृद्धप्रमातामह — सब अपनी पत्नियों के साथ आहूत होते हैं। साथ ही विश्वेदेवों यानी पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष की स्थापना अनिवार्य है। श्राद्ध के अधिष्ठाता देवता वसु, रुद्र और आदित्य भी उपस्थित होते हैं।
नील सरस्वती की पूजा का संकल्प कैसे लेते हैं?
नील सरस्वती संकल्प: हाथ में जल लेकर बोलें — 'मैं अमुक कार्य की सिद्धि के लिए नील सरस्वती देवी का आवाहन करता हूँ, हे माता! मेरी जिह्वा पर आसीन हो जाइए।' फिर दीप-धूप से देवी को प्रणाम।
माँ शैलपुत्री का मंत्र क्या है?
माँ शैलपुत्री का आवाहन मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः।' बीज मंत्र: 'ह्रीं श्रीं शैलपुत्र्यै नमः'
षोडशोपचार पूजा में आवाहन क्या होता है?
षोडशोपचार में आवाहनम् = देवता का प्रेमपूर्वक आवाहन कर उन्हें बुलाना — यह पूजा का प्रथम उपचार है।
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