विस्तृत उत्तर
षोडशोपचार पूजा और मंत्र जप के बाद, भैरव को प्रसन्न करने के लिए श्रीभैरवताण्डवस्तोत्रं का पाठ किया जाता है।
इस स्तोत्र में भैरव को कुष्ठहरम् (त्वचा और अन्य विकट रोगों का नाशक) कहा गया है, जो सीधे तौर पर असाध्य रोग निवारण के लक्ष्य को पूरा करता है।





