विस्तृत उत्तर
महेश्वर कवचम् में कुष्ठ (त्वचा रोग), पामा और विचर्चिका (खाज, खुजली) का स्पष्ट उल्लेख है।
इनमें रक्तगत और त्वचीय दोषों का शोधन कवच के निवारण प्रभाव के रूप में बताया गया है।
इन रोगों का स्पष्ट उल्लेख इंगित करता है कि कवच का लक्ष्य रोग के केवल लक्षण को शांत करना नहीं है, बल्कि उसके मूल कारण और उसकी जड़ को शुद्ध करना है।





