विस्तृत उत्तर
असितांग भैरव का ध्यान श्लोक (रुद्रयामल तंत्र से) इस प्रकार है:
नमः रक्त ज्वाल जटा धरम सतम् रक्ता तेजो मयम्।
हस्ते शूल कपाल पाश डमरु लोकस रक्षा करम्।।
निर्वाणं श्वान वाहनं त्रिनयनम् आनन्द कोलाहलम्।
वन्दे भूत पिशाच नाथकं क्षेत्रस्य पालम् शिवम्।।


