विस्तृत उत्तर
असितांग भैरव के ध्यान श्लोक का अर्थ:
यह श्लोक असितांग भैरव को:
- ▸रक्त की ज्वाला जैसी जटाओं वाला
- ▸रक्त के समान तेजस्वी
- ▸शूल, कपाल, पाश और डमरू धारण करके लोकों की रक्षा करने वाले
- ▸निर्वाण स्वरूप, श्वान वाहन पर आरूढ़, तीन नेत्रों वाला
- ▸क्षेत्र का पालक (क्षेत्रस्य पालम्) बताता है।
उनके क्षेत्रपालक होने का अर्थ है कि वे साधक के परिवेश और शरीर की रक्षा करते हैं।





