विस्तृत उत्तर
त्रिपुर भैरवी के ध्यान श्लोक का अर्थ इस प्रकार है:
जिनकी देह की कांति सहस्त्रों उगते हुए सूर्यों के समान है, जो रक्त-वर्ण के रेशमी वस्त्र धारण करती हैं, जिनके गले में मुंडों की माला है, वे अपने हाथों में जपमाला, पुस्तक, वर और अभय मुद्रा धारण करती हैं। उनके तीन नेत्र हैं और मस्तक पर रत्नजड़ित मुकुट पर चंद्रमा की कला सुशोभित है।
उनका यह स्वरूप गहन प्रतीकों से युक्त है। सहस्त्र सूर्यों का तेज उनके ज्ञान और चेतना की प्रचंड ऊर्जा का प्रतीक है। हाथ में पुस्तक और माला यह दर्शाती है कि वे परम ज्ञान और साधना की अधिष्ठात्री हैं।
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