विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में माँ भैरवी को 'नित्य प्रलय' की अधिष्ठात्री कहा गया है।
संसार का प्रत्येक कण हर क्षण बन और बिगड़ रहा है, यही नित्य प्रलय है। माँ भैरवी इसी परिवर्तन की शक्ति हैं।
साधक के जीवन में उनकी कृपा इसी 'नित्य प्रलय' के रूप में कार्य करती है। वे पुरानी बाधाओं, रोगों, शत्रुओं और नकारात्मक कर्मों का प्रतिक्षण क्षय करती हैं, ताकि साधक के नवीन, शुद्ध और शक्तिशाली स्वरूप का निर्माण हो सके।





