विस्तृत उत्तर
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये सिद्धियाँ साधक को क्यों प्राप्त होती हैं।
उदाहरण के लिए, 'वाक् सिद्धि' इसलिए मिलती है क्योंकि माँ भैरवी स्वयं 'परा वाक्' (सर्वोच्च वाणी) की शक्ति हैं। उनकी साधना से साधक की वाणी उस मूल स्रोत से जुड़ जाती है, जिससे उसमें सत्यता और प्रभाव का संचार होता है।
इसी प्रकार, उनकी 'नित्य प्रलय' की शक्ति ही साधक के शत्रुओं, बाधाओं और रोगों का समूल नाश कर उसे विजय और आरोग्य प्रदान करती है।





