विस्तृत उत्तर
साधक के जीवन में उनकी कृपा इसी 'नित्य प्रलय' के रूप में कार्य करती है। वे पुरानी बाधाओं, रोगों, शत्रुओं और नकारात्मक कर्मों का प्रतिक्षण क्षय करती हैं, ताकि साधक के नवीन, शुद्ध और शक्तिशाली स्वरूप का निर्माण हो सके।
उनकी 'नित्य प्रलय' की शक्ति ही साधक के शत्रुओं, बाधाओं और रोगों का समूल नाश कर उसे विजय और आरोग्य प्रदान करती है।
माँ त्रिपुर भैरवी की 'नित्य प्रलय' की शक्ति अंततः साधक के अज्ञान, अहंकार और कर्म-संस्कारों का भी 'प्रलय' अर्थात नाश कर देती है, जिससे आत्मा अपने शुद्ध, मुक्त स्वरूप को प्राप्त करती है।





