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विस्तृत उत्तर
गुरु ही शिष्य को समझाते हैं कि सिद्धियाँ लक्ष्य नहीं, बल्कि मार्ग के पड़ाव हैं। वे साधक को सांसारिक बाधाओं से मुक्त करने के लिए मिलती हैं, ताकि वह निर्विघ्न होकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी कर सके।
यदि साधक इन सिद्धियों में उलझकर अहंकार कर बैठे, तो यह उसके पतन का कारण बन जाता है।
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