का सरल उत्तर
सिद्धियाँ लक्ष्य नहीं, मार्ग के पड़ाव हैं — यदि साधक इनमें उलझकर अहंकार करे तो यह उसके पतन का कारण बनता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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