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विस्तृत उत्तर
नाग-पूजा और कालसर्प शांति के अनुष्ठान अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इनमें की गई एक छोटी सी त्रुटि भी विपरीत फल दे सकती है।
तामसिक या आसुरी प्रयोग — जैसे किसी पर तंत्र-बाधा लगाना या शत्रु-नाश के लिए नाग-शक्ति का आवाहन करना — पूर्णतः निषिद्ध हैं।
ऐसा करने से साधक स्वयं 'नाग-पाश' में और गहरे फँस जाता है और उसका पतन हो जाता है।
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