सावधानियाँनाग शक्ति का गलत प्रयोग करने से क्या होता है?नाग शक्ति का गलत (तामसिक) प्रयोग करने से साधक स्वयं 'नाग-पाश' में और गहरे फँस जाता है और उसका पतन हो जाता है।#नाग शक्ति#गलत प्रयोग#नाग पाश
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतकालसर्प शांति का वास्तविक अर्थ क्या है?कालसर्प शांति का वास्तविक अर्थ है — अपने कर्म-बंधन (नाग-पाश) को पशुपति शिव को अर्पित करना ताकि वे उसे अपने आभूषण के रूप में धारण कर जीव को मुक्त कर दें।#कालसर्प शांति#नाग पाश#पशुपति
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतशिव के गले में नाग क्यों होते हैं?शिव के गले में नाग इसलिए हैं क्योंकि जो बंधन (पाश) सामान्य जीव को बाँधता है, वह शिव के पूर्ण नियंत्रण में है — नाग शिव के आभूषण हैं, भय का कारण नहीं।#शिव नाग#आभूषण#पशुपति
शिव-नाग संयुक्त सिद्धांतनाग को पाश क्यों कहा जाता है?नाग को पाश इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जीव को कर्म-बंधन में बाँधता है — जो बंधन सामान्य जीव के लिए पाश है, वही शिव के लिए आभूषण है।#नाग पाश#बंधन#कर्म
कालसर्प दोष: परिचय और कारणराहु और केतु कालसर्प दोष में क्या भूमिका निभाते हैं?राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) कर्म-फल के दण्ड-अधिकारी हैं — इनके मध्य सभी ग्रहों के फँसने से कालसर्प दोष बनता है।#राहु केतु#कालसर्प दोष#छाया ग्रह