विस्तृत उत्तर
कालसर्प शांति का वास्तविक अर्थ है — अपने 'नाग-पाश' (कर्म-बंधन) को 'पशुपति' (शिव) को अर्पित कर देना, ताकि वे (शिव) उसे अपने आभूषण के रूप में धारण कर लें और जीव (पशु) को उस बंधन से 'मुक्त' कर दें।
यह केवल एक ज्योतिषीय अनुष्ठान नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें साधक अपने कर्म-बंधन को शिव के चरणों में समर्पित करता है।





