विस्तृत उत्तर
अपात्र व्यक्ति भी शिवभक्ति से योग्य बन सकता है, क्योंकि पाठ में कहा गया है कि पात्रता न होने पर भी यदि कोई प्राणी परम भक्ति से युक्त हो, तो महेश्वर शिव उसके विविध अज्ञानरूप अंधकारों को दूर करके उस पर प्रसन्न हो जाते हैं। इसमें संदेह नहीं कहा गया है। इसलिए शिवभक्ति केवल पहले से योग्य व्यक्ति के लिये नहीं, बल्कि अज्ञान दूर करके साधक को शिवप्रसाद का पात्र बनाने वाली शक्ति है।
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