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विस्तृत उत्तर
शम का लक्षण इन्द्रियों की मिथ्या प्रवृत्ति का अभाव है। पाठ में कहा गया है कि अपने लिये अथवा दूसरे के लिये जिस व्यक्ति की इन्द्रियाँ मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, वह शम के लक्षणों वाला कहा जाता है। इसका अर्थ है कि इन्द्रियाँ असत्य, अनुचित या विकृत मार्ग पर न जाएँ। इसलिए शम आंतरिक संयम और इन्द्रियवृत्तियों की सत्य तथा धर्ममय स्थिरता से जुड़ा है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 25
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