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योग और वैराग्य📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 25⏱ 1 मिनट पठन

शम का लक्षण क्या है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

जिसकी इन्द्रियाँ अपने या दूसरे के लिये मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, उसमें शम का लक्षण है।

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विस्तृत उत्तर

शम का लक्षण इन्द्रियों की मिथ्या प्रवृत्ति का अभाव है। पाठ में कहा गया है कि अपने लिये अथवा दूसरे के लिये जिस व्यक्ति की इन्द्रियाँ मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, वह शम के लक्षणों वाला कहा जाता है। इसका अर्थ है कि इन्द्रियाँ असत्य, अनुचित या विकृत मार्ग पर न जाएँ। इसलिए शम आंतरिक संयम और इन्द्रियवृत्तियों की सत्य तथा धर्ममय स्थिरता से जुड़ा है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 25
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शम का लक्षण क्या है को संदर्भ सहित समझें

शम का लक्षण क्या है का सबसे सीधा सार यह है: जिसकी इन्द्रियाँ अपने या दूसरे के लिये मिथ्या प्रवृत्त नहीं होतीं, उसमें शम का लक्षण है।

योग और वैराग्य जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 25 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 25 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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