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विस्तृत उत्तर
युक्त योगी वह है जो सभी आसक्तियों से निवृत्त हो चुका है। पाठ में कहा गया है कि सभी आसक्तियों से निवृत्त प्राणी युक्त-योगी कहा जाता है। उसी प्रसंग में मायायुक्त कर्मफल का त्याग करने वाले को शिवात्मा कहा गया है। इसलिए युक्त योगी का अर्थ योगाभ्यास करने वाले सामान्य व्यक्ति से आगे है; वह आसक्ति और फल-बन्धन से हटकर स्थिर योगस्थिति में रहने वाला साधक है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59, श्लोक 23
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