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विस्तृत उत्तर
मुनियों का बल और सौभाग्य शिवभक्ति के कारण बताया गया है। पाठ में पहले कहा गया है कि ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र और अन्य देवता शिवभक्ति से ही उत्तम पद को प्राप्त हुए। उसी क्रम में मुनियों का बल और सौभाग्य भी शिवभक्ति के ही कारण कहा गया है। इसलिए भक्ति देवता और मुनि दोनों की श्रेष्ठ स्थिति का आधार बताई गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 36
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