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विस्तृत उत्तर
शिवभक्ति व्रत और उपवास से श्रेष्ठ बताई गई है क्योंकि पाठ में उसकी तुलना बड़े-बड़े अनुष्ठानों से की गई है। हजारों चान्द्रायण व्रत, सैकड़ों प्राजापत्यव्रत, मासभर किये गए उपवास और अन्य अनुष्ठानों की अपेक्षा शिवभक्ति श्रेष्ठ कही गई है। इसका अर्थ है कि बाहरी तप और व्रत महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं, पर शिव के प्रति भक्ति उनसे भी अधिक फलदायक और श्रेष्ठ मानी गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 33
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