विस्तृत उत्तर
उपवास के बाद की विधि स्पष्ट बताई गई है। दिन-रात उपवास करके दूसरे दिन प्रातःकाल स्नान करना चाहिए। फिर ब्रह्मकूर्च-विधि से बनाए गए पंचगव्य का पान करना चाहिए। उसके बाद आचमन करना चाहिए और शिव के आगे विधिपूर्वक ब्रह्मसम्बन्धी गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए। यह क्रम अघोर मंत्र, पंचगव्य, हवन और शिवस्नान से जुड़े प्रायश्चित-विधान का भाग है। इस विधि को गंभीर पापों से शुद्धि के संदर्भ में रखा गया है।
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