विस्तृत उत्तर
आचमन = शुद्धिकरण क्रिया — मंत्र जप, पूजा, या किसी भी धार्मिक कर्म से पूर्व अनिवार्य।
आचमन विधि
1आसन
पूर्व या उत्तर मुख बैठें। दोनों पैर मिलाकर (या पद्मासन/सुखासन)।
2हाथ शुद्धि
दाहिने हाथ को जल से धोएँ।
3जल ग्रहण
दाहिने हाथ की हथेली में (गाय के कान के आकार = गोकर्ण मुद्रा) जल लें — अँगूठे के मूल (ब्रह्मतीर्थ) से।
4तीन बार आचमन
प्रत्येक बार एक-एक चम्मच जल (ब्रह्मतीर्थ से) पिएँ:
- ▸'ॐ केशवाय नमः' — प्रथम आचमन
- ▸'ॐ नारायणाय नमः' — द्वितीय
- ▸'ॐ माधवाय नमः' — तृतीय
(कुछ परम्पराओं में: 'ॐ अच्युताय नमः', 'ॐ अनन्ताय नमः', 'ॐ गोविन्दाय नमः')
5हाथ पोंछना
दो बार ओठ पोंछें। फिर हाथ धोएँ।
6अंगस्पर्श (वैकल्पिक)
उँगलियों से आँख, नाक, कान, कन्धे, नाभि, हृदय स्पर्श — शरीर के विभिन्न अंगों की शुद्धि।
नियम
- ▸शुद्ध जल प्रयोग करें।
- ▸बैठकर करें (खड़े होकर न करें)।
- ▸दाहिने हाथ से ही — बायाँ हाथ वर्जित।
- ▸गर्म/ठण्डा दोनों जल मान्य।
कब करें
- ▸मंत्र जप से पहले (अनिवार्य)
- ▸पूजा, संध्या, हवन, भोजन, स्नान के बाद
- ▸शौचालय से लौटने पर
- ▸अशुद्ध स्पर्श के बाद
उद्देश्य: बाह्य (शरीर) और आन्तरिक (मन) शुद्धि। बिना शुद्धि मंत्र जप अप्रभावी।





