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शिवभक्ति📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 34⏱ 1 मिनट पठन

शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में क्यों गिरता है?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

शिवभक्ति से हीन प्राणी स्वर्गादि के लिए कर्मजाल में फँसकर मृत्युलोक में बार-बार गिरता है।

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विस्तृत उत्तर

शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में इसलिए गिरता है क्योंकि वह स्वर्गादि प्राप्ति के लिये अनेक कर्मों के जाल में फँसा रहता है। पाठ में इस मृत्युलोक को गहन गिरिगुहारूप कहा गया है और शिवभक्ति से रहित प्राणी को उसमें बार-बार गिरने वाला बताया गया है। इसके विपरीत भक्तिभाव से युक्त प्राणी मुक्त हो जाता है। इसलिए भक्ति कर्मजाल से ऊपर उठाकर मुक्ति की दिशा देती है।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 34
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में क्यों गिरता है को संदर्भ सहित समझें

शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में क्यों गिरता है का सबसे सीधा सार यह है: शिवभक्ति से हीन प्राणी स्वर्गादि के लिए कर्मजाल में फँसकर मृत्युलोक में बार-बार गिरता है।

शिवभक्ति जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 34 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 34 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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