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विस्तृत उत्तर
शिवभक्ति के बिना जीव बार-बार संसार में इसलिए गिरता है क्योंकि वह स्वर्गादि प्राप्ति के लिये अनेक कर्मों के जाल में फँसा रहता है। पाठ में इस मृत्युलोक को गहन गिरिगुहारूप कहा गया है और शिवभक्ति से रहित प्राणी को उसमें बार-बार गिरने वाला बताया गया है। इसके विपरीत भक्तिभाव से युक्त प्राणी मुक्त हो जाता है। इसलिए भक्ति कर्मजाल से ऊपर उठाकर मुक्ति की दिशा देती है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 60, श्लोक 34
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