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विस्तृत उत्तर
वास्तविक ज्ञान यह है कि अव्यक्त प्रकृति से लेकर परमाणु तक जड़ जगत के सभी पदार्थों से ईश्वर को पृथक जाना जाए। पाठ में यही वास्तविक ज्ञान कहा गया है। आगे कहा गया है कि ऐसे ज्ञान और भक्ति या श्रद्धा से सम्पन्न पुरुष पर भगवान् शंकर अवश्य प्रसन्न होते हैं। इसलिए ज्ञान का अर्थ जड़ पदार्थों और ईश्वर के भेद को समझना है, और यह भक्ति के साथ शिवप्रसन्नता का कारण बनता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 10, PDF पृष्ठ 59-60, श्लोक 28-29
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