ध्यान अनुभवध्यान में ईश्वर के साथ एकत्व का अनुभव कैसा होता है?'अहं ब्रह्मास्मि' = अनुभव। सर्वत्र ईश्वर (सब=एक=मैं)। अनंत प्रेम, शांति, आनंद अश्रु, शब्दहीन। 'तत् त्वम् असि' (छांदोग्य)। 'सर्वं खल्विदं ब्रह्म।' दुर्लभ → स्थिर=जीवनमुक्ति।#ईश्वर#एकत्व#अनुभव
लोकपंचमहाभूत का उदाहरण क्या बताता है?यह ईश्वर की सर्वव्यापकता और निर्लिप्तता समझाता है।#पंचमहाभूत#ईश्वर#चतुःश्लोकी
लोकवितल लोक से हमें क्या सीख मिलती है?वितल लोक सिखाता है कि भौतिक वैभव मोक्ष नहीं देता; ईश्वर की सत्ता को पहचानकर आध्यात्मिक मार्ग की ओर बढ़ना चाहिए।#वितल सीख#भौतिकता#मोक्ष
श्री रुद्र-कवच-संहिताअमोघ कवच में 'अणोरणीयान्' का क्या तात्पर्य है?इसका अर्थ है वह ईश्वर जो अणु से भी छोटा और सूक्ष्म है, फिर भी अनंत शक्तिशाली है।#अणोरणीयान्#सूक्ष्म#ईश्वर
श्री रुद्र-कवच-संहितारुद्र कवच के अनुसार हृदय और वक्ष-स्थल की रक्षा कौन करता है?साधक के हृदय की रक्षा महादेव और वक्ष-स्थल की रक्षा भगवान ईश्वर करते हैं।#महादेव#ईश्वर#हृदय रक्षा
पाशुपत अस्त्र साधनापाशुपत दर्शन में 'पति' किसे कहा गया है?शैव दर्शन में सर्वोच्च ईश्वर या पशुपतिनाथ को 'पति' कहा गया है।#पति#शैव दर्शन#ईश्वर
भक्ति एवं आध्यात्मभगवान हमारी प्रार्थना कैसे सुनते हैंभगवान अंतर्यामी हैं — हर हृदय में निवास करते हैं। प्रार्थना सीधे उन तक पहुँचती है। उनका उत्तर मन में शांति, स्पष्ट विचार, परिस्थिति में बदलाव या गुरु-संत के माध्यम से आता है।#प्रार्थना#भगवान#श्रवण
हिंदू दर्शनभगवान निराकार है या साकार हिंदू धर्म क्या कहता हैहिंदू धर्म में भगवान निराकार भी हैं और साकार भी — दोनों सत्य, दोनों मान्य। उपनिषद = निराकार ब्रह्म; पुराण/गीता = साकार अवतार। तुलसीदास — 'सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा'। जैसे जल = निराकार, बर्फ = साकार — पदार्थ एक ही।#निराकार#साकार#ईश्वर
हिंदू दर्शनभगवान दुखों को क्यों नहीं रोकतेब्रह्मसूत्र 2.1.34 — ईश्वर निर्दय नहीं; दुःख जीव के कर्मों से आता है। गीता 2.14 — सुख-दुःख अनित्य। अविद्या (अज्ञान) दुःख का मूल कारण। आत्मा दुःख से अप्रभावित (गीता 2.23)। ईश्वर ने मोक्ष मार्ग दिया — शाश्वत दुःख मुक्ति।#दुख#कर्म#ईश्वर
सनातन सिद्धांतपरमात्मा क्या है?परमात्मा वह सर्वोच्च, सर्वव्यापी और असीमित चेतना है जो तीनों लोकों में व्याप्त है। गीता (15/17) में उसे सबका धारण-पोषण करने वाला अविनाशी ईश्वर कहा गया है। वह सत्-चित्-आनंद स्वरूप है।#परमात्मा#ईश्वर#सर्वव्यापी