विस्तृत उत्तर
श्लोक 4 के अनुसार 'अणोरणीयान्' का अर्थ है कि वह ईश्वर जो अणु (परमाणु) से भी अत्यंत सूक्ष्म है, फिर भी अपार शक्ति का स्वामी है।
इसका अर्थ है वह ईश्वर जो अणु से भी छोटा और सूक्ष्म है, फिर भी अनंत शक्तिशाली है।
श्लोक 4 के अनुसार 'अणोरणीयान्' का अर्थ है कि वह ईश्वर जो अणु (परमाणु) से भी अत्यंत सूक्ष्म है, फिर भी अपार शक्ति का स्वामी है।
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