विस्तृत उत्तर
इसका विशेष प्रयोग 'आपदा-निवारण' और असाध्य 'रोग-रक्षा' के लिए किया जाता है। यह साधक के अंग-प्रत्यंग को एक अभेद्य 'मृत्यु-विजयी' दुर्ग बना देता है।
इसका प्रयोग बड़ी आपदाओं को टालने और गंभीर रोगों से रक्षा कर मृत्यु पर विजय पाने हेतु होता है।
इसका विशेष प्रयोग 'आपदा-निवारण' और असाध्य 'रोग-रक्षा' के लिए किया जाता है। यह साधक के अंग-प्रत्यंग को एक अभेद्य 'मृत्यु-विजयी' दुर्ग बना देता है।
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